Wednesday, 30 November 2022

पूर्वी उत्तर-पूर्वी भारत यात्रा

#Simlipal_Odisha

पूर्वी और उत्तरी-पूर्व भारत के नैसर्गिक सौंदर्य,मनोरम दृश्यों, पर्यावरणीय व सामाजिकता के बारे में जितना बताया जाए उतना कम लगता है। विभिन्न पर्वत मालायें,पूजनीय नदियाँ जैसे गंगा ,ब्रह्मपुत्र, बैतरनी आदि और लगभग हर प्रकार के वनों को समेटे हुए यह क्षेत्र अपने सौंदर्य में अद्भुत झलक बिखेरती है।

37 दिन के  यात्रा के  प्रथम चरण में ओडिशा के सिमलीपाल टाइगर रिज़र्व का प्राकृतिक ,पर्यावरणीय व वन्यजीवों की अद्भुत विविधता मन को मोह लेती है।बहिरपानी,असुरखाल जैसे झरनों ने ,विशालकाय व पुराने  साल वृक्षों  के वनों में  पक्षियों का चहचहाना,हिरणों के झुंडों का  हम लोगों के तरफ बहुत उत्सुकता से और टकटकी लगा कर देखना मानो प्रतीत होता है कि यही जीवन  की शांति और संतुष्टि है बाकी सब बस दिखावटी व निरर्थक।

हम लोगो के रुकने का प्रबंध जंगलवासी गांव कुमारी और गुड़गुड़िया में हुआ ।उन लोगो का हमारे प्रति व्यवहार, हम् लोगो के बारे में चिंता करते देखकर लगा की अतिथि देवों भव के भाव को दिल मे लेकर ,वे लोग अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए तथा संसाधनों के अभाव के बावजूद ,बिना किसी शिकायत के जंगलवासी अपनी जिंदगी कैसे जी ले रहे हैं।

ट्रैकिंग के दौरान हम लोगों का सिमलीपाल की सबसे उच्च शिखर मेघासानी तथा पाइन फॉरेस्ट के मध्य जाना अविस्मरणीय रहा । सिमलीपाल के अंतिम दिन में जंगलवासियों द्वारा विभिन्न उपलक्ष्यों पर विभिन्न नृत्यों का प्रदर्शन ,उनके सांस्कृतिक विरासत का प्रकृति के प्रति समर्पण व समृद्धि को दिखाता है।

इस यात्रा के आगे के पड़ाव में भितरकनिका और सुंदरवन  के मैंग्रोव व जीवजंतुओं के बारे में बताने का प्रयास करूँगा।

#east_north_east_tour

#OFRC_RFO_TRAINING

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